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मीडिया की समकालीन चुनौतियों पर मंथन, पत्रकारों ने एकजुटता और निष्पक्ष पत्रकारिता को बताया समय की जरूरत
मीडिया की समकालीन चुनौतियों पर मंथन, पत्रकारों ने एकजुटता और निष्पक्ष पत्रकारिता को बताया समय की जरूरत सिद्धार्थनगर। पत्रकारिता के बदलते स्वरूप, बढ़ती चुनौतियों और पत्रकारों के अधिकारों एवं सुरक्षा को लेकर रविवार को सिद्धार्थनगर के विकास भवन सभागार में गंभीर मंथन हुआ। पत्रकार एकता फोरम के बैनर तले आयोजित “मीडिया की समकालीन चुनौतियां” विषयक विचार गोष्ठी में जिलेभर के पत्रकारों ने हिस्सा लिया और निष्पक्ष, निर्भीक एवं तथ्यपरक पत्रकारिता के साथ पत्रकारों की एकजुटता को समय की सबसे बड़ी जरूरत बताया। दोपहर 12 बजे शुरू हुई गोष्ठी में पत्रकारिता की विश्वसनीयता, कॉपी-पेस्ट संस्कृति, खोजी पत्रकारिता, खबरों की तथ्य-जांच, पत्रकारों के उत्पीड़न तथा संगठन की भूमिका जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर वक्ताओं ने अपने विचार रखे। कार्यक्रम के आयोजक वरिष्ठ पत्रकार मनोज कुमार रहे। मुख्य अतिथि प्रेस क्लब इंडिया के राष्ट्रीय पदाधिकारी अविनाश कुमार शुक्ला रहे, जबकि अध्यक्षता पत्रकार एकता फोरम के संस्थापक डॉ. तेजस यादव ने की। मंच संचालन वरिष्ठ पत्रकार रविन्द्र कुमार कश्यप ने किया। कार्यक्रम का शुभारंभ मां शारदे के चित्र पर पुष्प अर्पित करने एवं दीप प्रज्वलित करने के साथ हुआ। इसके बाद वक्ताओं ने पत्रकारिता को लोकतंत्र की मजबूत आधारशिला बताते हुए बदलते मीडिया परिवेश में पत्रकारों की जिम्मेदारियों पर चर्चा की। सशक्त भारत न्यूज़18 के संपादक शैलेश कुमार राव ने कहा कि पत्रकारिता केवल पेशा नहीं, बल्कि लोकतंत्र के प्रति एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। पत्रकार को किसी दबाव या भेदभाव से प्रभावित हुए बिना निर्भीक और निष्पक्ष होकर खबर करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि पत्रकार की कलम और कैमरा समाज की समस्याओं को सामने लाने वाली तीसरी आंख की तरह काम करते हैं। वरिष्ठ पत्रकार डॉ. जावेद कमाल ने पत्रकारों को कॉपी-पेस्ट की प्रवृत्ति से बाहर निकलकर मौलिक एवं खोजी पत्रकारिता को बढ़ावा देने की अपील की। उन्होंने कहा कि पत्रकार को हर परिस्थिति में सजग प्रहरी की भूमिका निभानी चाहिए। पत्रकारों के बढ़ते उत्पीड़न पर चिंता जताते हुए उन्होंने संगठन को मजबूत और सक्रिय बनाने तथा पत्रकारों की एकजुटता पर विशेष जोर दिया। उन्होंने अपनी कविताओं के माध्यम से पत्रकारों में उत्साह का संचार भी किया। कार्यक्रम आयोजक एवं ‘अपराध के अंत’ के संपादक मनोज कुमार ने कहा कि संवेदनशील और विवादित मामलों में खबर प्रकाशित करने से पहले तथ्यों की गहन पड़ताल जरूरी है। पत्रकारिता में जल्दबाजी के बजाय सत्यापन और जिम्मेदारी को प्राथमिकता दी जानी चाहिए, तभी मीडिया की विश्वसनीयता कायम रह सकती है। इस अवसर पर प्रेस क्लब जनपद सिद्धार्थनगर के जिलाध्यक्ष भारत कन्नौजिया सहित पत्रकारों ने अतिथियों का फूल-माला एवं बुके देकर स्वागत किया। भारत कन्नौजिया ने कहा कि किसी भी पत्रकार को स्वयं को अकेला नहीं समझना चाहिए। पत्रकारों के हित और सम्मान की लड़ाई में संगठन उनके साथ मजबूती से खड़ा रहेगा। मुख्य अतिथि अविनाश कुमार शुक्ला ने कहा कि वर्तमान समय में पत्रकारों की एकजुटता पहले से कहीं अधिक जरूरी हो गई है। उन्होंने कहा कि संगठन की मजबूती ही पत्रकारों की आवाज को प्रभावी बनाती है। पत्रकारों को सजग प्रहरी की भूमिका निभाते हुए समाज और लोकतंत्र के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का ईमानदारी से निर्वहन करना चाहिए। अध्यक्षीय संबोधन में डॉ. तेजस यादव ने कहा कि पत्रकार लोकतंत्र के चौथे स्तंभ और समाज की तीसरी आंख हैं। किसी भी खबर को प्रकाशित या प्रसारित करने से पहले उसके प्रत्येक पहलू की तथ्यात्मक जांच-पड़ताल आवश्यक है। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता की ताकत उसकी विश्वसनीयता है और इस विश्वसनीयता को बनाए रखना प्रत्येक पत्रकार की जिम्मेदारी है। गोष्ठी के दौरान मीडिया महाकुंभ-2026, मीडिया कार्यशाला एवं पत्रकार सम्मान समारोह के आयोजन को लेकर भी चर्चा हुई। आयोजकों के अनुसार आगामी कार्यक्रमों की तिथियों की घोषणा शीघ्र की जाएगी। कार्यक्रम में वरिष्ठ पत्रकार मनोज पासवान, संतोष गोंड, नंदनी मौर्या, डीएन शुक्ला, दीपू पासवान, सुशील खेतान, जवाहर लाल, राजकुमार वर्मा, उमेश प्रताप सिंह, श्याम नारायण सिंह, अहमद हुसैन, जय प्रकाश सहित जिले के अनेक पत्रकार उपस्थित रहे।यदि इसे ‘सरस सलिल/इंडिया टुडे’ शैली के और ज्यादा धारदार संस्करण में चाहिए, तो इसका शीर्षक-उपशीर्षक और शुरुआती लीड और भी ज्यादा प्रभावशाली बनाया जा सकता है।