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विपक्ष का काम मोदी की कुर्सी बचाना नहीं, सत्ता परिवर्तन का विकल्प देना है
विपक्ष का काम मोदी की कुर्सी बचाना नहीं, सत्ता परिवर्तन का विकल्प देना है ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~ सरकार और राष्ट्र में फर्क समझना लोकतंत्र की पहली शर्त है। सत्ता की आलोचना, वैकल्पिक नेतृत्व की पेशकश और चुनाव के जरिए सरकार बदलने की कोशिश लोकतांत्रिक व्यवस्था की बुनियादी विशेषताएं हैं। ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~ आरपी यादव/ब्यूरो/तेजसबिंदु ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~ लोकतंत्र में सत्ता किसी नेता की स्थायी संपत्ति नहीं, बल्कि जनता के विश्वास से मिलने वाली जिम्मेदारी है। नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री हैं और भारतीय जनता पार्टी केंद्र की सत्ता में है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि विपक्ष सरकार को चुनौती देने का अपना अधिकार छोड़ दे। विपक्ष का दायित्व सत्ताधारी दल की कुर्सी सुरक्षित रखना नहीं, बल्कि जनता के सामने एक विश्वसनीय राजनीतिक विकल्प प्रस्तुत करना है। सरकार देश नहीं है। सरकारें बदलती हैं, नेतृत्व बदलता है और चुनावी जनादेश भी बदल सकता है। देश की निरंतरता संविधान, नागरिकों और लोकतांत्रिक संस्थाओं से बनी रहती है। इसलिए सरकार की नीतियों की आलोचना को राष्ट्रविरोधी ठहराना या सत्ता परिवर्तन की मांग को लोकतंत्र के खिलाफ बताना उचित नहीं है। असहमति लोकतंत्र की कमजोरी नहीं, उसकी जीवंतता का प्रमाण है। ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~ #जनादेश का अर्थ स्थायी सत्ता नहीं ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~ 2024 के लोकसभा चुनाव ने भारतीय राजनीति में बदलते जनादेश की अहमियत को फिर रेखांकित किया। भाजपा 2019 की 303 सीटों से घटकर 2024 में 240 सीटों पर आ गई। हालांकि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) ने सहयोगी दलों के समर्थन से बहुमत हासिल किया और नरेंद्र मोदी तीसरी बार प्रधानमंत्री बने। इस परिणाम का संदेश स्पष्ट है—जनता किसी दल को समर्थन दे सकती है, लेकिन उसका समर्थन स्थायी या बिना शर्त नहीं होता। चुनावी राजनीति में बहुमत बदलना, गठबंधन बनना और नए नेतृत्व का उभरना लोकतांत्रिक प्रक्रिया का स्वाभाविक हिस्सा है। ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~ #विरोध के साथ विकल्प भी जरूरी ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~ विपक्ष की भूमिका केवल सरकार की आलोचना करने तक सीमित नहीं हो सकती। उसे बेरोजगारी, महंगाई, शिक्षा, स्वास्थ्य, किसानों की समस्याओं और सामाजिक न्याय जैसे मुद्दों पर ठोस नीतियां प्रस्तुत करनी होंगी। जनता केवल यह नहीं जानना चाहती कि मौजूदा सरकार की कमियां क्या हैं; वह यह भी जानना चाहती है कि विकल्प मिलने पर उसकी जिंदगी में क्या बदलेगा। विश्वसनीय नेतृत्व, स्पष्ट नीतियां और प्रशासनिक तैयारी विपक्ष की राजनीतिक ताकत बनते हैं। केवल सत्ता परिवर्तन का नारा पर्याप्त नहीं, उसके साथ बेहतर शासन का खाका भी जरूरी है। लोकतांत्रिक विकल्प वही प्रभावी होता है जो आलोचना के साथ समाधान भी दे। ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~ #संविधान देता है जवाबदेही का अधिकार ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~ भारतीय संविधान की व्यवस्था सरकार को जवाबदेह बनाती है। अनुच्छेद 75(3) के अनुसार केंद्रीय मंत्रिपरिषद लोकसभा के प्रति सामूहिक रूप से उत्तरदायी है। संसदीय प्रक्रिया के तहत सरकार के बहुमत को चुनौती देने और उसकी जवाबदेही तय करने के रास्ते भी मौजूद हैं। इसलिए चुनाव लड़ना, सरकार की आलोचना करना और जनता से वैकल्पिक नेतृत्व के समर्थन की अपील करना लोकतांत्रिक राजनीति का वैध हिस्सा है। हां, विरोध के नाम पर हिंसा, धमकी या गैरकानूनी गतिविधियों को उचित नहीं ठहराया जा सकता। शांतिपूर्ण असहमति और हिंसक गतिविधियों के बीच अंतर बनाए रखना जरूरी है। ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~ #मजबूत विपक्ष, जवाबदेह सरकार ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~ सत्ताधारी दल को यह स्वीकार करना होगा कि विपक्ष लोकतंत्र का प्रतिद्वंद्वी जरूर है, लेकिन संवैधानिक व्यवस्था का शत्रु नहीं। संसद में सवाल पूछना, नीतियों की समीक्षा करना और वैकल्पिक प्रस्ताव रखना सरकार को अधिक जवाबदेह बना सकता है। इसी तरह विपक्ष को भी अपने आरोपों के समर्थन में तथ्य देने और जनता के सामने अपनी नीतियों का हिसाब रखने के लिए तैयार रहना चाहिए। नरेंद्र मोदी के समर्थकों को उनकी सरकार के समर्थन और दोबारा जनादेश की मांग करने का पूरा अधिकार है। उसी तरह विपक्षी दलों को सरकार बदलने के लिए जनता से समर्थन मांगने का अधिकार है। इन दोनों के बीच अंतिम फैसला किसी राजनीतिक नारे से नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया और मतदाताओं के निर्णय से होगा। लोकतंत्र का सार यही है कि सत्ता को चुनौती देने का रास्ता खुला रहे।विपक्ष मोदी की सत्ता बचाने के लिए बाध्य नहीं है; उसका दायित्व जनता के सामने ऐसा विकल्प रखना है, जिसे मतदाता मौजूदा सरकार के स्थान पर चुन सकें। सत्ता में बने रहना हो या सत्ता से बाहर जाना—अंतिम अधिकार जनता का है। कुर्सियां बदल सकती हैं, सरकारें बदल सकती हैं, लेकिन संविधान और लोकतंत्र किसी एक नेता या दल से बड़े हैं। यही लोकतंत्र की असली ताकत और सत्ता की सबसे बड़ी जवाबदेही है।