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“सतना में बिका कानून! ठेकेदारों के आगे नतमस्तक सिस्टम, ‘नजराना राज’ में गाँव-गाँव बह रही शराब”
*“सतना में बिका कानून! ठेकेदारों के आगे नतमस्तक सिस्टम, ‘नजराना राज’ में गाँव-गाँव बह रही शराब”* *मध्यप्रदेश सतना ब्यूरो वीर विक्रम सिंह* सतना मोहन सरकार के आदेशों की उड़ रही धज्जियाँ — सिविल लाइन से खुलेआम सप्लाई, वीडियो वायरल, फिर भी कार्रवाई शून्य सतना : जिले में कानून व्यवस्था अब मज़ाक बनकर रह गई है। प्रदेश सरकार के मुखिया मोहन बाबू की सख्ती के दावे जमीन पर पूरी तरह फेल नजर आ रहे हैं। सतना में शराब ठेकेदार खुलेआम नियमों को ठेंगा दिखा रहे हैं और जिम्मेदार विभाग हाथ पर हाथ धरे तमाशा देख रहे हैं। शहर के सिविल लाइन स्थित शराब ठेका इस समय सुर्खियों में है, जहां से खुलेआम वाहनों में शराब की पेटियां भरकर ग्रामीण इलाकों में सप्लाई की जा रही है। यह पूरा खेल किसी छुपे कैमरे का नहीं, बल्कि खुलेआम चल रहा है, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है। सबसे बड़ा और चौंकाने वाला खुलासा तब हुआ जब ठेकेदार ने खुद यह दावा कर दिया कि उसे किसी कानून का डर नहीं है। कारण—हर महीने “नजराना” समय पर पहुंचता है। अगर यह सच है, तो यह सिर्फ एक ठेकेदार की मनमानी नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की सड़ांध को उजागर करता है। हटी गाँव व ग्रामीण क्षेत्रों में तेजी से बढ़ती शराब की सप्लाई ने सामाजिक ताना-बाना बिगाड़ दिया है। युवा पीढ़ी नशे की गिरफ्त में जा रही है, परिवार टूट रहे हैं, और अपराध बढ़ने का खतरा भी मंडरा रहा है। लेकिन इन गंभीर हालातों के बावजूद पुलिस और आबकारी विभाग के इंस्पेक्टर निलेश गुप्ता की चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है। क्या प्रशासन को यह सब दिखाई नहीं दे रहा, या फिर जानबूझकर आंखें मूंद ली गई हैं? क्या वाकई “नजराना” के आगे कानून कमजोर पड़ चुका है? अगर यही हाल रहा तो आने वाले समय में हालात और भी भयावह हो सकते हैं। अब पूरे जिले की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या जिम्मेदार अधिकारी इस मामले में सख्त कार्रवाई करेंगे या फिर यह “नजराना राज” यूं ही चलता रहेगा। *कानून बिके बाजार में, और न्याय हुआ लाचार*, *नजराने की छाया में, सच हो गया बीमार।* *जो रखवाले थे शहर के, वही बने गुनहगार*, *अब कैसे बचेगा ये समाज, जब सिस्टम ही बेकार…!*