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RTI, जनसुनवाई और शिकायत व्यवस्था—आम आदमी की आवाज को जवाबदेही में बदलने का रास्ता
आरपी यादव ~ बिहार ब्यूरो तेजसबिंदु न्यूज
16 Aug 2026
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जन-अधिकार: सवाल पूछने से समाधान तक
RTI, जनसुनवाई और शिकायत व्यवस्था—आम आदमी की आवाज को जवाबदेही में बदलने का रास्ता
बिहार: लोकतंत्र में जनता केवल वोट देने वाली नहीं, बल्कि शासन व्यवस्था की महत्वपूर्ण हिस्सेदार है। सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, राशन, रोजगार और सरकारी योजनाओं से जुड़े सवालों पर नागरिक को जानकारी मांगने, शिकायत करने और जवाब पाने का अधिकार है।
RTI: सवाल को दस्तावेज में बदलने की ताकत
सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 नागरिकों को सरकारी रिकॉर्ड से संबंधित जानकारी प्राप्त करने का कानूनी माध्यम देता है। योजना में कितना पैसा स्वीकृत हुआ, किस मद में खर्च हुआ, काम किसे मिला और उसकी स्थिति क्या है—ऐसे सवाल सरकारी दावों की वास्तविक तस्वीर समझने में मदद कर सकते हैं।
संदेह आरोप नहीं होता; दस्तावेज पड़ताल को मजबूत बनाते हैं।
जनसुनवाई: शिकायत से कार्रवाई तक
हर समस्या RTI से हल नहीं होती। कई मामलों में संबंधित विभाग या प्रशासन के सामने शिकायत दर्ज कराना जरूरी होता है। लेकिन शिकायत दर्ज होना अंतिम समाधान नहीं। नागरिक को यह भी देखना चाहिए कि शिकायत किस अधिकारी के पास गई, जांच क्या हुई और कार्रवाई का परिणाम क्या रहा।
जवाब नहीं मिला तो आगे का रास्ता
RTI में निर्धारित प्रक्रिया के तहत अपील की व्यवस्था है। अन्य प्रशासनिक शिकायतों में भी संबंधित नियमों के अनुसार अपीलीय या शिकायत निवारण व्यवस्था का उपयोग किया जा सकता है। इसलिए आवेदन, प्राप्ति, जवाब और कार्रवाई से जुड़े दस्तावेज सुरक्षित रखना जरूरी है।
अधिकार का इस्तेमाल, जिम्मेदारी के साथ
जन-अधिकार का अर्थ प्रशासन से टकराव नहीं, बल्कि कानूनी तरीके से जवाबदेही सुनिश्चित करना है। हर प्रशासनिक देरी को भ्रष्टाचार मानना उचित नहीं; पहले तथ्य जुटाना, फिर सवाल पूछना और उसके बाद निष्कर्ष निकालना ही जिम्मेदार नागरिकता और पत्रकारिता है।
RTI, जनसुनवाई और शिकायत व्यवस्था आम नागरिक को केवल शिकायतकर्ता नहीं, बल्कि जागरूक और सहभागी नागरिक बनने का अवसर देती हैं।
“लोकतंत्र में सवाल पूछने वाला नागरिक समस्या नहीं, जवाबदेही की सबसे मजबूत आवाज है।”